पोलड़ गांव कैथल विवाद की शुरुआत
हरियाणा के कैथल जिले में स्थित पोलड़ गांव आज एक बड़े विवाद के केंद्र में है। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) ने इस गांव के 206 परिवारों को नोटिस भेजकर गांव खाली करने का आदेश दिया है। यह पोलड़ गांव कैथल विवाद का सबसे गंभीर मोड़ है।
विभाजन के बाद बसे थे ये परिवार
1947 के भारत-पाक विभाजन के दौरान, पाकिस्तान के मुल्तान और अन्य इलाकों से आए शरणार्थी परिवारों ने इस स्थान पर अपना घर बसाया था। उस समय यह जगह घने जंगल से भरी हुई थी। इन परिवारों ने अपनी मेहनत से इस जगह को एक खुशहाल गांव में बदल दिया।
ASI का दावा और ग्रामीणों की परेशानी
ASI का कहना है कि पोलड़ की 48 एकड़ जमीन एक संरक्षित पुरातत्व स्थल है। विभाग का दावा है कि यह जमीन 1925 से ही उनके अधिकार में है। ASI के अनुसार, यहां महाभारत काल का एक गांव था जो पांडव-कौरव युद्ध में नष्ट हो गया था।
गांव की वर्तमान स्थिति
पोलड़ गांव में लगभग 6-7 हजार लोग रहते हैं। यहां 2500 के आसपास मतदाता हैं। गांव में स्कूल, मंदिर, गुरुद्वारा, मस्जिद और अन्य सभी जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं। सरकार ने भी यहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनवाए हैं।
पुरानी खुदाई के नतीजे
2012-13 में ASI ने यहां खुदाई की थी, लेकिन उन्हें कोई महत्वपूर्ण पुरातत्व सामग्री नहीं मिली। गांव के लोगों का कहना है कि सामान्य ईंटें और मिट्टी के बर्तन मिलना कोई असामान्य बात नहीं है।
कानूनी लड़ाई जारी
गांव वालों ने इस मामले में कानूनी लड़ाई शुरू की है। उनके वकील का कहना है कि ASI को इस जमीन का वास्तविक मालिकाना हक कभी नहीं मिला है। RTI के तहत मिली जानकारी के अनुसार, ASI ने खुद माना है कि यह जमीन उन्हें अवार्ड नहीं हुई है।
सरकारी मदद की उम्मीद
स्थानीय विधायक देवेंद्र हंस ने कहा है कि वे मुख्यमंत्री से मिलकर इस मामले को उठाएंगे। उनका कहना है कि यदि ASI अपनी बात पर अड़ा रहता है, तो ग्रामीणों के पुनर्वास की मांग की जाएगी।
ग्रामीणों की भावनाएं
70 साल की राजरानी का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इस गांव को संवारने में लगाई है। “यहां पूरा जंगल था, हमने मेहनत करके इसे बसाया है। अब कहां जाएंगे?” यह सवाल हर ग्रामीण के मन में है।
भविष्य की संभावनाएं
पोलड़ गांव कैथल विवाद का समाधान अभी भी अनिश्चित है। गांव वाले कानूनी लड़ाई जारी रखने के लिए दृढ़ संकल्प हैं। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी समस्या को समझे और उचित समाधान निकाले।
निष्कर्ष
यह पोलड़ गांव कैथल विवाद सिर्फ जमीन का मामला नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य और उनकी भावनाओं का मामला है। 77 साल से यहां रह रहे लोगों के लिए यह गांव उनका घर है, और वे इसे छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।

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