हाल ही में इजराइल ईरान परमाणु हमला दुनियाभर की सुर्खियों में है। इस हमले में इजराइल ने 200 लड़ाकू विमानों के साथ ईरान के 100 ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमला किया। इस बड़े हमले का मुख्य लक्ष्य तेहरान से 220 किलोमीटर दक्षिण में स्थित नतांज की अंडरग्राउंड परमाणु लैबोरेट्री थी।
इजराइल के हमले के मुख्य लक्ष्य और परिणाम
इजराइल ईरान परमाणु हमला भारतीय समयानुसार सुबह 5:15 बजे शुरू हुआ था। इस व्यापक हमले में ईरान के 6 प्रमुख शहरों को एकसाथ निशाना बनाया गया। हमले के दौरान कुल 330 बम गिराए गए, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमताओं को कमजोर करना था।
इस हमले में ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए हैं। इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांडर और दो प्रमुख परमाणु वैज्ञानिक इस हमले के शिकार हुए हैं। तेहरान की कई इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है और नतांज की अंडरग्राउंड लैबोरेट्री से काला धुआं उठता दिखाई दिया है।
ईरान की परमाणु तकनीक और यूरेनियम संवर्धन
इजराइल ईरान परमाणु हमला का मुख्य कारण ईरान की बढ़ती परमाणु क्षमताएं हैं। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास मार्च 2025 तक करीब 275 किलोग्राम यूरेनियम था, जिसे 60% तक शुद्ध किया जा चुका था। कुछ रिपोर्ट्स में दावा है कि ईरान ने 87% तक यूरेनियम शुद्ध कर लिया है।
परमाणु बम बनाने के लिए 90% शुद्ध यूरेनियम की आवश्यकता होती है। ईरान की मौजूदा यूरेनियम मात्रा आधा दर्जन परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है। यह स्थिति इजराइल और पश्चिमी देशों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
सेंट्रीफ्यूज तकनीक: परमाणु संवर्धन की आधुनिक पद्धति
इजराइल ईरान परमाणु हमला में मुख्य निशाना सेंट्रीफ्यूज मशीनें थीं। ये अत्याधुनिक मशीनें यूरेनियम संवर्धन के लिए उपयोग की जाती हैं। प्रकृति में केवल 0.7% यूरेनियम U-235 के रूप में मिलता है, जबकि परमाणु बम के लिए इसकी मात्रा 90% होनी चाहिए।
सेंट्रीफ्यूज मशीन एक तेज गति से घूमने वाला उपकरण है जो भारी और हल्के परमाणुओं को अलग करती है। यह प्रक्रिया दूध से मलाई निकालने के समान है। यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड गैस को सेंट्रीफ्यूज में डालकर U-238 और U-235 को अलग किया जाता है।
नतांज परमाणु केंद्र की विशेषताएं
नतांज की अंडरग्राउंड लैबोरेट्री 80 मीटर यानी लगभग 26 मंजिल की गहराई में स्थित है। ईरान की उन्नत सीमेंट तकनीक के कारण यह सुविधा अत्यधिक सुरक्षित मानी जाती है। इजराइल ईरान परमाणु हमला के बावजूद भी इस लैबोरेट्री को पूर्ण नुकसान नहीं पहुंचा है।
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने पुष्टि की है कि फिलहाल इस प्लांट से कोई रेडिएशन नहीं निकल रहा है। यह दर्शाता है कि ईरान की परमाणु सुविधाएं अत्यधिक मजबूत संरचना के साथ बनाई गई हैं।
परमाणु बम निर्माण की जटिल प्रक्रिया
परमाणु बम बनाने के लिए यूरेनियम के आइसोटोप U-235 या प्लूटोनियम के आइसोटोप Pu-239 का उपयोग किया जाता है। न्यूक्लियर रिएक्टर में U-235 पर न्यूट्रॉन की बमबारी से चेन रिएक्शन शुरू होती है। इस प्रक्रिया में U-235 टूटकर बेरियम और क्रिप्टन में बदल जाता है।
एक U-235 परमाणु के टूटने से लगभग 200 मिलियन इलेक्ट्रॉनवोल्ट ऊर्जा निकलती है। चेन रिएक्शन में असंख्य परमाणु टूटते हैं, जिससे हजारों टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा निकलती है। 1945 में हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 15 हजार टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा निकली थी।
इजराइल के पूर्व हमले और साइबर आक्रमण
इजराइल ईरान परमाणु हमला कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी ईरान की परमाणु सुविधाओं पर कई हमले हो चुके हैं:
2010 में अमेरिका और इजराइल ने स्टक्सनेट वायरस से साइबर हमला किया था। इस हमले में हजारों सेंट्रीफ्यूज मशीनें नष्ट हो गई थीं। इसे ऑपरेशन ओलिंपिक गेम्स का नाम दिया गया था।
2021 में नतांज लैबोरेट्री में तोड़फोड़ की गई और कई सेंट्रीफ्यूज मशीनें क्षतिग्रस्त हुईं। 2024 में भी ड्रोन अटैक के जरिए इस सुविधा को नुकसान पहुंचाया गया था।
ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या
2000 के बाद से ईरान के कई प्रमुख परमाणु वैज्ञानिक मारे जा चुके हैं। 2010 में मसूद अली मोहम्मदी और माजिद शाहरीयारी, 2011 में दरयूश रेजाईनेजाद, और 2020 में मोहसेन फखरीजादे की हत्या हुई है। मोहसेन फखरीजादे को ईरानी परमाणु कार्यक्रम का मुख्य आर्किटेक्ट माना जाता था।
अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव और भविष्य के परिणाम
इजराइल ईरान परमाणु हमला का अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है। यह हमला मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा सकता है। ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने के लिए इजराइल और पश्चिमी देश निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
यह घटना दर्शाती है कि आधुनिक युग में परमाणु तकनीक और साइबर युद्ध कितने महत्वपूर्ण हो गए हैं। ईरान की भूमिगत परमाणु सुविधाओं की मजबूत संरचना भविष्य में इस तरह के हमलों को और चुनौतीपूर्ण बना सकती है।

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